बावरा मन देखने चला एक सपना (विस्तारित)

संदर्भ

२००५ की सुधीर मिश्रा द्वारा निर्देशित फ़िल्म “हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी” का गीत “बावरा मन देखने चला एक सपना” एक ऐसी रचना है जिसमें स्वानंद किरकिरे के शब्दों, शंतनु मोइत्रा के संगीत और शुभा मुद्गल और स्वयं स्वानंद जी की आवाज़ ने मिलकर एक जादुई दुनिया बुनी है। यह गीत एक मुक्त, बेचैन और सपने देखती ज़िंदगी जैसा लगता है, जिसका रोम-रोम अपने अस्तित्व के समुद्र में भावनाओं की अनदेखी लहरों से खेलते हुए, आसमान के तारों को छूना चाहता है।

प्रेरित होकर मैंने भी इस गीत में पाँच नए अंतरे जोड़ने की कोशिश की। हालाँकि सच यह है कि शायद मेरी यह कोशिश अधूरी रह गई — शायद इसलिए कि मैं न तो स्वानंद जी की गहराई से जीवन को महसूस कर पाया हूँ, और न ही उतनी ही खूबसूरती से इसे शब्दों में उतार पाया हूँ। फिर भी, इन पंक्तियों में कपोल-कल्पित ही सही, वही बावरा मन कहीं हल्के से झलक जाए, यही आशा है।

स्वानंद जी द्वारा लिखित पंक्तिया बरगंडी रंग में है।

बावरा मन देखने चला एक सपना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरे से मन की देखो बावरी हैं बातें
बावरे से मन की देखो बावरी हैं बातें
बावरी सी धड़कने हैं बावरी हैं साँसें
बावरी सी करवटों से निंदिया दूर भागे
बावरे से नैन चाहें बावरे झरोखों से
बावरे नज़ारों को तकना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरी सी हो घटा, और बावरी बौछार हो,
को: बावरी सी हो घटा, और बावरी बौछार हो
इस मधुर संतूर की जो बावरी मल्हार हो,
बावरी सी दरिया चाहे, बावरी मुहानों से,
को: बावरी सी दरिया चाहे, बावरी मुहानों से,
बावरे समंदर से लगना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरे से अभ्र में एक बावरा सा काग हों,
बावरे से अभ्र में एक बावरा सा काग हों,
बावरे से चंद्रमा पर बावरा एक दाग हों,
बावरे से इस जिगर में बावरी सी आग हों,
बावरा सा जुगनू चाहे, हल्के-हल्के टिमटिमाते,
बावरे अंधेरों में चमकना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरी सी पनघटें, और बावरी पुरवाइयाँ,
बावरा सा है पवन, और बावरी है पाखियाँ,
बावरी सी रीत से एक बावरी अनजान हो,
बावरे से स्वप्न उसके, बावरे अरमान हो,
बावरी सी बिंदिया चाहे, सारे भेदों को भुला के,
बावरे अलक में दमकना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरे से इस जहाँ में बावरा एक साथ हो
इस सयानी भीड़ में बस हाथों में तेरा हाथ हो
बावरी सी धुन हो कोई बावरा इक राग हो
ओ बावरी सी धुन हो कोई बावरा इक राग हो
बावरे से पैर चाहें बावारे तरानों के
बावरे से बोल पे थिरकना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरी सी फुसफुसाहट, बावरी सर्गोशियाँ,
बावरी सी है उमंगें, बावरी मदहोशियाँ,
बावरा राहगीर है, और बावरी पगडंडियाँ
बावरा राहगीर है, और बावरी पगडंडियाँ
बावरी सी भीड़ चाहे, बावरे तमाशों के,
बावरे ठिठोलों पे हँसना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरी सी हो नक़्क़ाशी, बावरा रंगसाज़ हो,
को: बावरी सी हो नक़्क़ाशी, बावरा रंगसाज़ हो,
इस बसेरे की बया का बावरा अंदाज़ हो,
बावरी सी मेहंदी चाहे, नाम साजन का छुपा के,
बावरी सी मेहंदी चाहे, नाम साजन का छुपा के,
बावरी हथेली पे रचना,
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरा सा हो अंधेरा बावरी ख़ामोशियाँ
को: बावरा सा हो अंधेरा बावरी ख़ामोशियाँ
स: थरथराती लौ मद्धम बावरी मदहोशियाँ
बावरा एक घूँघटा चाहे हौले हौले बिन बताये
बावरा एक घूँघटा चाहे हौले हौले बिन बताये
बावरे से मुखड़े से सरकना
बावरा मन देखने चला एक सपना

बावरा मन देखने चला एक सपना
बावरा मन देखने चला एक सपना

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Acharya UmaswaTi